युवाओं में अचानक कार्डियक अरेस्ट बन रहा गंभीर चिंता का विषय
हल्द्वानी,। हाल के वर्षों में हमने कई प्रसिद्ध हस्तियों की अचानक मृत्यु की खबरें पढ़ी हैं, जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ लगते थे और जिन्हें कोई गंभीर बीमारी भी नहीं थी। इनमें से कई लोग अपनी सामान्य दिनचर्या के काम कर रहे थे, तभी अचानक बेहोश होकर गिर पड़े और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। ऐसे अधिकांश मामलों के पीछे कारण अचानक होने वाला कार्डियक अरेस्ट होता है।
हमारा हृदय एक जटिल विद्युत प्रणाली के माध्यम से काम करता है। हृदय के भीतर स्वतः उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म विद्युत संकेत पूरे हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचते हैं और उन्हें एक समन्वित तरीके से संकुचित होने के लिए प्रेरित करते हैं। यही प्रक्रिया हृदय को रक्त पंप करने में सक्षम बनाती है, जिससे शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं। जब यह पंपिंग रुक जाती है, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं। कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब हृदय की विद्युत गतिविधि में अचानक गड़बड़ी आ जाती है और हृदय प्रभावी रूप से रक्त पंप करना बंद कर देता है।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. संजीव मल्होत्रा ने बताया “अचानक होने वाला कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक एक जैसी स्थितियां नहीं हैं, हालांकि कई बार गंभीर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय को रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में से किसी एक में अचानक रुकावट आ जाती है, जो आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल की परत पर बने रक्त के थक्के के कारण होती है। इससे हृदय की मांसपेशियों के एक हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे वह क्षतिग्रस्त हो जाता है और समय के साथ वहां निशान ऊतक बन सकता है। इससे हृदय की पंपिंग क्षमता कम हो जाती है। कुछ मामलों में हार्ट अटैक के कारण हृदय की विद्युत प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। वास्तव में, कोरोनरी आर्टरी डिजीज आज भी अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट का सबसे प्रमुख कारण है।
पिछले कुछ वर्षों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे खराब जीवनशैली एक प्रमुख कारण है। धूम्रपान, नशीले पदार्थों का सेवन, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसी आदतें कम उम्र में ही धमनियों में वसा जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इसके अलावा, स्कूली बच्चों और किशोरों में बढ़ता मोटापा तथा डायबिटीज भी भविष्य में हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा रहा है। परिणामस्वरूप, कोरोनरी आर्टरी डिजीज जीवन के सबसे उत्पादक वर्षों में ही सामने आ सकती है। डॉ. संजीव ने आगे बताया “कुछ आनुवंशिक या जन्मजात स्थितियां भी अचानक कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इनमें हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी एक महत्वपूर्ण बीमारी है, जिसमें हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं। इसके कारण सीने में दर्द, सांस फूलना, बेहोशी के दौरे या कुछ मामलों में अचानक कार्डियक अरेस्ट भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त, हृदय की धड़कनों से जुड़ी कुछ असामान्य स्थितियां, जैसे लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम और अरिद्मोजेनिक राइट वेंट्रिकुलर डिस्प्लेसिया, भी अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं। अच्छी बात यह है कि आधुनिक जांच तकनीकों की मदद से इन बीमारियों की पहचान समय रहते की जा सकती है और उचित उपचार के माध्यम से इनके जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
