वनाग्नि से निपटने को रुद्रप्रयाग में बरती मुस्तैदी

रुद्रप्रयाग,। आगामी वनाग्नि सीजन की चुनौतियों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में ग्राम कोदिमा के वन क्षेत्र में विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल कर अपनी मारक क्षमता और तैयारियों का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास के जरिए न केवल आधुनिक उपकरणों को परखा गया, बल्कि आपदा के समय विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की अहमियत को भी रेखांकित किया गया।
वनाग्नि प्रबंधन के लिए आयोजित इस वृहद अभ्यास में फायर सर्विस, वन विभाग, एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी गणनाथ सिंह बिष्ट के नेतृत्व में टीमों ने काल्पनिक आग की सूचना पर त्वरित रिस्पॉन्स देते हुए मौके पर मोर्चा संभाला। अभ्यास का मुख्य आकर्षण फायर सर्विस की तकनीकी कुशलता रही। दुर्गम क्षेत्रों में आग पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए फायर सर्विस टीम ने मिनी वाटर टेंडर का सफल प्रयोग किया। टीम ने पंपिंग तकनीक और होजरील की सहायता से कम समय में आग बुझाने का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही पारंपरिक और आधुनिक तरीकों के मिश्रण से फायर लाइन बनाने की विधि का भी अभ्यास किया, जो जंगल की आग को आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ने से रोकने में सबसे कारगर साबित होती है।
मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अक्सर सूचना मिलने के बाद विभागों के बीच बेहतर तालमेल न होने के कारण आग विकराल रूप ले लेती है। इस ड्रिल का प्राथमिक उद्देश्य पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों के बीच सूचना तंत्र को मजबूत करना और उपलब्ध संसाधनों का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करना था। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी गणनाथ सिंह बिष्ट ने बताया कि वनाग्नि जैसी आपातकालीन स्थिति में समय की बचत ही सबसे बड़ी सफलता है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से हमने अपनी तकनीकी और व्यावहारिक कमियों को पहचान कर उन्हें दूर करने का प्रयास किया।

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