खाद की जंग जीत रहा भारत, रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन से कम हुई विदेशों पर निर्भरता

देहरादून,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले 12 सालों में देश के उर्वरक क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति आई है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग, भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की तरफ प्रभावी कदम उठा रहा है। इन्हीं कदमों ने वैश्विक स्तर पर आए बड़े संकटों से हमारे अन्नदाताओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों और हमलों के कारण पूरी दुनिया की सप्लाई चेन चरमरा गई, प्राकृतिक गैस और अमोनिया जैसे कच्चे माल की भारी किल्लत हो गई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद के दाम आसमान छूने लगे। लेकिन भारत सरकार ने शुरुआत से ही युद्ध स्तर पर काम करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के वैकल्पिक रास्ते तलाशे और दुनिया भर के उत्पादकों से सीधा संपर्क बनाकर देश में खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की।
नए यूरिया प्लांट्स की शुरुआतः पिछले 12 वर्षों में देश के भीतर 6 नए आधुनिक यूरिया प्लांट्स स्थापित किए गए हैं, जिससे हर साल उत्पादन में 76.2 लाख मीट्रिक टन की शानदार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इतना ही नहीं, आने वाले समय में 25.4 लाख मीट्रिक टन सालाना क्षमता वाले दो और नए यूरिया प्लांट्स चालू होने के लिए तैयार हैं। यूरिया उत्पादन में नया रिकॉडर्रू साल 2014-15 में जहां देश का यूरिया उत्पादन केवल 225 लाख मीट्रिक टन था, वहीं साल 2023-24 में यह बढ़कर 314.07 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। साल 2024-25 में भी देश ने 306.67 लाख मीट्रिक टन का मजबूत उत्पादन दर्ज किया है।
51 प्रतिशत अग्रिम भंडारणः कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने खरीफ 2026 के लिए कुल 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता का अनुमान लगाया है । इसके मुकाबले सरकार के पास मौजूदा वक्त में लगभग 195.79 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक मौजूद है। आमतौर पर सिर्फ 33 प्रतिशत स्टॉक बफर के रूप में रहता था, वहां आज भारत 51 प्रतिशत से अधिक के अग्रिम भंडार के साथ मजबूत स्थिति में है। कुल उपलब्धता में बड़ी वृद्धिरू वैश्विक संकट के बाद भी देश का घरेलू उत्पादन 118.15 लाख मीट्रिक टन रहा। अगर इसमें आयात को भी जोड़ दिया जाए, तो संकट के बाद से अब तक देश में खाद की कुल उपलब्धता में लगभग 153.79 लाख मीट्रिक टन की भारी बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के ऐतिहासिक उछाल के बाद भी मोदी सरकार ने भारतीय किसानों पर एक पैसे का भी बोझ नहीं बढ़ने दिया है। सरकार भारी सब्सिडी देकर किसानों को बेहद सस्ते दामों पर खाद उपलब्ध करा रही है। रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान का देश के किसानों ने दिल से स्वागत किया है। धरती माता की सेहत सुधारने के इस राष्ट्रव्यापी संकल्प के कारण पर्यावरण-अनुकूल खादों के उपयोग में बड़ा बदलाव आया है। अमोनियम सल्फेट की खपत में पिछले साल की तुलना में करीब 60,000 टन की बढ़ोतरी हुई है। कृषि विज्ञान केंद्रों की देखरेख में रिकॉर्ड 1.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया गया है। भारत सरकार के प्रभावी और रणनीतिक प्रयासों से आज देश में खाद की सुरक्षा अत्यंत सुदृढ़, स्थिर और पूरी तरह सुरक्षित है, जहां सभी मुख्य उर्वरकों की उपलब्धता उनकी कुल मांग से लगातार अधिक बनी हुई है. सरकार के निरंतर कदमों से घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि हो रही है और देश में उर्वरकों का पर्याप्त एडवांस भंडार मौजूद है. इससे हमारे अन्नदाताओं की हर जरूरत समय पर और बिना किसी रुकावट के पूरी हो रही है, जिससे उन्हें अपनी खेती के लिए सभी जरूरी खाद बेहद किफायती दरों पर आसानी से उपलब्ध कराई जा रही है।

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