“मानवाधिकार के अधिकार” पर हुआ कार्यशाला का आयोजन

देहरादून,। मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय संगठन द्वारा “मानवाधिकार के अधिकार” विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन मसूरी रोड स्थित पुरुकूल हेरिटेज ग्रीन अपार्टमेंट्स में किया गया। कार्यशाला का आयोजन जस्टिस राजेश टंडन (मुख्य संरक्षक, संगठन) के मार्गदर्शन में, उनके कार्यालय में किया गया। इस अवसर पर संगठन के सदस्यों को नेम प्लेट एवं आईडी कार्ड का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में संस्था से जुड़ने वाले नए सदस्यों का स्वागत भी किया गया। इस अवसर पर संगठन के मुख्य संरक्षक जस्टिस राजेश टंडन ने कहा मानवाधिकार के मुख्य कार्य हैं गरिमा और समानता सुनिश्चित करना, व्यक्तियों को दुव्र्यवहार से बचाना, सरकार को जवाबदेह बनाना, और जीवन को बेहतर बनाने वाली मूलभूत आवश्यकताओं (शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता) की पूर्ति के लिए एक ढांचा प्रदान करना; ये अधिकार सभी मनुष्यों के लिए हैं और इनकी रक्षा के लिए सरकारें कानूनी रूप से बाध्य होती हैं, जबकि व्यक्तियों का कर्तव्य है कि वे दूसरों के अधिकारों का सम्मान करें।
कार्यक्रम का संचालन प्रदेश अध्यक्ष मधु जैन ने किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन जैन ने कहा कि मानवाधिकार के प्रमुख कार्य है गरिमा और समानता की रक्षाः सभी व्यक्तियों को उनकी पृष्ठभूमि, रंग या विश्वास के बावजूद, सम्मान के साथ जीने का अधिकार देना और शारीरिक व बौद्धिक विकास के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना। शोषण और भेदभाव से बचाव करना  व्यक्तियों को राज्य, किसी समूह या अन्य व्यक्तियों द्वारा दुव्र्यवहार, भेदभाव और बुरी प्रथाओं से बचाना। सरकार को बाध्य करना (जवाबदेही) सरकारों को मानवाधिकारों का सम्मान करने, उनकी रक्षा करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करना; नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए सरकार से जवाबदेह ठहराने का अधिकार देना। बुनियादी जरूरतों की पूर्ति से जीवन को जीने लायक बनाने वाले अधिकारों (भोजन, शिक्षा, काम, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता) को सुनिश्चित करना और उनकी पूर्ति के लिए कानून व सेवाएँ प्रदान करने का दायित्व सरकारों पर डालना। स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति से भाषण, अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों को बढ़ावा देना, ताकि लोग बिना डर के अपनी बात रख सकें और अपने विश्वासों का पालन कर सकें। न्याय और कानून का शासन से एक ऐसा समाज बनाना जहाँ न्याय हो, लोग सही चुनाव कर सकें, और ’मनुष्य का नहीं, कानून का शासन’ स्थापित हो, जिससे बहुसंख्यक अल्पसंख्यकों का शोषण न कर सकें। संक्षेप में, मानवाधिकार एक मानक हैं जो बताते हैं कि हर व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए और सरकार की क्या जिम्मेदारी है, ताकि हर कोई गरिमा और स्वतंत्रता के साथ जी सके। इस अवसर पर आशा पैन्यूली, सुनील अग्रवाल, रेखा निगम, रेखा राणा, एस पी सिंह, पी सी वर्मा, डॉ मुकुल शर्मा, डॉक्टर दिनेश शर्मा, अनामिका जिंदल,विनीत गुप्ता, प्रदीप नागलिया, विजय कथूरिया, अनिल वर्मा, शशि टंडन, अजीत, कौशल, नरेश चंद जैन भी उपस्थित रहे आदि लोग मौजूद रहे।

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